महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना, जानें इसके पीछे की रोचक कथा और महत्...
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए मोक्षदायक धाम
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषताएं
महाकालेश्वर भारत का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। यहाँ की भस्म आरती, जो ताजे शव की चिता भस्म से होती है, इसे अद्वितीय बनाती है। इसकी पूजा तांत्रिक पद्धति से होती है और यह मृत्यु के भय को नष्ट करने वाला स्थान माना जाता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन
यहाँ सुबह 4 बजे भस्म आरती से दिन की शुरुआत होती है। भक्त गर्भगृह में जाकर शिवलिंग को स्पर्श कर सकते हैं। विशेष पर्वों पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी
पुराणों के अनुसार, उज्जैन में एक राक्षस रत्नकरण का वध करने हेतु भगवान शिव ने बालक रूप में प्रकट होकर उसका संहार किया और वहीं महाकाल रूप में स्थापित हुए।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का रहस्य
यहाँ की भस्म आरती, गुप्त सुरंगें और ध्वनि-गुंजन प्रणाली रहस्यमयी हैं। कहा जाता है कि यह शिवलिंग मृत्यु के समय आत्मा को मोक्ष प्रदान करता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास
महाभारत, स्कंद पुराण और शिव पुराण में इसका उल्लेख मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में मराठा शासकों ने कराया था।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां है?
यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। यह क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और रेलवे स्टेशन से 2 किमी दूर है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कपाट कब खुलेंगे?
मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 4 बजे भस्म आरती के साथ खुलते हैं।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कपाट कब बंद होंगे?
रात्रि 11 बजे तक मंदिर दर्शन हेतु खुला रहता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
- रेल मार्ग: उज्जैन रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग: उज्जैन बस सेवा द्वारा प्रदेश के अन्य शहरों से जुड़ा है।
- हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (55 किमी) है।
निष्कर्ष
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शिवभक्ति, आत्मशुद्धि और मोक्ष का पवित्र केंद्र है। एक बार महाकाल नगरी की यात्रा अवश्य करें।
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